हर किसी को आगे बढ़ने के लिए और अपना कॅरियर बनाने के लिये एक सही दिशा निर्देश की और एक उचित प्लेटफॉर्म कि आवश्यकता होती है यह दिशा निर्देश यदि किसी बच्चे को बचपन से मिल जाये तो वह अपना आगे का कॅरियर खुद तय कर सकता है और उसके लिए आगे बढ़ने की राह आसान हो जाती है। लेकिन कुछ बच्चे ऐसे है जिनको इस प्रकार का परिवेश नही मिल पाता है। और कुछ की अपनी पारिवारिक समस्याएं होती है जिससे वो अपने मुकाम तक पहुचने में असफल हो जाते है।
यदि गरीब, मजदूर वर्ग के बच्चो की बात की जाय कि ये बच्चे शिक्षा के क्षेत्र में अपना कॅरियर क्यो नही बना पा रहे है या अपना खुद का व्यवसाय क्यो नही कर पाते है जबकि आज के इस दौर में शिक्षा के साधनों की कोई कमी नही है ओर रोजगार के भी बहुत सारे विकल्प है। पर फिर भी ऐसे बहुत सारे बच्चे है जो शिक्षा के क्षेत्र से कोसो दूर है जिनके पास न तो कोई मार्गदर्शक है, न कोई परामर्शदाता और नहीं उनके घर का ऐसा परिवेश है कि उनको शिक्षा के क्षेत्र में सही मार्गदर्शन मिल सके में चाहता हु की ऐसे बच्चो का भविष्य सुरक्षित रहे।
ऐसा ही एक बालक है सुनिल जो कि एक छोट से गॉंव का निवासी है गाँव गुमानपुरा, जो कि
मध्यप्रदेश के धार जिले के अंतर्गत आता है। जब सुनिल से मेरी बात हुई तो मेरी इच्छा उसकी पढ़ाई और कॅरियर के बारे में जानने की
हुई। सुनिल स्कूल तो जाता है पर निरंतरता नही है। और नही प्रतिदिन की स्कूल की गतिविधि के बारे में उसके घर पर चर्चा होती है। सुनिल को ओर अधिक गहराई से जाना समझा और उसकी प्रतिदिन की गतिविधि पता करी तो मालूम पडा।
सुनिल के माता पिता रोज सुबह गाँव मे ही कुछ घर पर जाकर गोबर , कूड़ा कचरा बुहारने व सफाई का काम करते है। जिसके बाद वो दिहाड़ी पर जाते है उनकी भी अपनी कृषि भूमि है पर पर्याप्त नही है । सुनिल के घर पर भी गाय और बकरियां है वो भी कभी कभी माता पिता के साथ जाकर चरवाहे का काम करता है सुनिल की अपनी समस्या है वह स्कूल चला भी जाये तो चरवाहे का काम कौन करे और माता पिता चरवाहे का काम करे तो फिर दिहाड़ी कैसे करे ।
सुनिल के स्कूल न जाने का कारण भले ही एक साधारण समस्या हो सकती है लेकिन उसके सम्पूर्ण जीवन की कल्पना करे तो मुझे ये कारण उसके और उसकी आने वाली पीढ़ी के लिये एक नियत जीवन जैसा लगता है जिसमे कभी बदलाव नही आयेगा। सुनिल को मैने एक उदाहरण के तौर पर बताया है पर ऐसे बहुत सारे बच्चे है जो अपनी पारिवारिक समस्याओं के कारण पढ़ाई नही कर पा रहे है ।
गुमानपुरा की ही बात करू तो गरीब व मजदूर वर्ग के लगभग 60-70% लोग आय के उचित स्रोत नही होने के कारण अस्थायी रूप से मजदूरी के लिये पलायन कर जाते है। जिसमे से कुछ ऐसे परिवार भी है जिनके बच्चे बहुत छोटे है उनकी देख रेख के लिये वो अपने बड़े बच्चो को साथ ले जाते है जिनकी उम्र पढ़ाई करने की है । ऐसे में वे बच्चे कैसे अपनी पढ़ाई करे और किस तरह अपने भविष्य को सुरक्षित करें। उनके लिए शिक्षा और स्कूल का कोई विकल्प नही रह जाता है अगर इस तरह के बच्चो का आंकड़ा एक राज्य स्तर पर और देश के स्तर पर देखा जाये तो ये बहुत ही बड़ा हो जाता है।
अब यदि सरकारी योजनाओं की बात करे तो ऐसे बच्चो के लिए प्रत्येक राज्य में अलग अलग तरीको से सुविधायें उपलब्ध करवाई जा रही है चूँकि सुनिल मध्यप्रदेश का निवासी है तो में मध्यप्रदेश की बात करता हु। जहा पर 6 से 14 वर्ष के बालक बालिका जो शाला त्याग चुके हैं या जो अभी तक शाला में दाखिल नही हुए है उनके लिए निःशुल्क आवासीय विद्यालय की व्यवस्था की गई है। जिसमे ऐसे बच्चे अपनी पढ़ाई कर सकते हैं। पर प्रवासी मजदूरों के बच्चे इस योजना का लाभ नही ले पाते है।
अभी हाल ही में मध्य प्रदेश सरकार के द्वारा प्रवासी मजदूरों के लि ऐतिहासिक योजना की शुरुआत की गई है, योजना का नाम श्रम सिद्धि योजना रखा गया है इस योजना के अंतर्गत ऐसे प्रवासी मजदूर (Migrant Workers) जो मध्य प्रदेश से बाहर के राज्यों से घर लौटे हैं उन्हें भी मनरेगा के जॉब कार्ड दिए जाएंगे जॉब कार्ड बनाने के लिए डोर टू डोर सर्वे किया जाएगा स्किल्ड और अनस्किल्ड मजदूर अलग अलग केटेगरी में किए जाएंगे, जिन्हें उनकी स्किल के हिसाब से काम मिलेगा।
करीब 23 हजार से ज्यादा
पंचायतों में लगभग 21 लाख मजदूरों को मनरेगा के तहत मजदूरी दी गई है। श्रम सिद्धि अभियान के तहत अब नए मजदूरों के
जॉब कार्ड भी बनाए जाएंगे। इतना ही नहीं यह भी ऐलान किया कि प्रवासी मजदूरों को संबल
योजना में भी शामिल किया जाएगा। इस योजना के तहत हितग्राहियों (Beneficiaries) के बच्चों की पढ़ाई, बेटी की शादी, बिजली, रोजगार और अंतिम संस्कार तक का
खर्च भी सरकार उठायेगी।
सरकार की इस प्रकार की योजनाए प्रवासी मजदूरों के लिए बहुत
ही कारगर सिद्ध होगी। बस हमारा कर्तव्य इतना होना चाहिए की अपने आस पास जितने भी
प्रवासी मजदूर है और जिनको इस योजना की जानकारी नहीं है, उनको अवगत कराये ताकि उनको भी इस योजना का लाभ मिल सके। और
प्रवासी मजदूरो के अधिक से अधिक बच्चे शिक्षा ले सके। लेकिन हम फिर भी अपने मूल
उद्देश्य को पूरा नही कर पाएंगे...✍️


